बाहर क्या बाँधेगे, भगवान दें तो इसी आँगन में तीन गाएँ और बँधा सकती हैं।
सारा गाँव गाय देखने आया। नहीं आए तो सोभा और हीरा, जो अपने सगे भाई थे। होरी के हृदय में भाइयों के लिए अब भी कोमल स्थान था। वह दोनों आ कर देख लेते और प्रसन्न हो जाते तो उसकी मनोकामना पूरी हो जाती। साँझ हो गई। दोनों पुर ले कर लौट आए। इसी द्वार से निकले, पर पूछा कुछ नहीं।
होरी ने डरते-डरते धनिया से कहा - न सोभा आया, न हीरा। सुना न होगा?
धनिया बोली - तो यहाँ कौन उन्हें बुलाने जाता है।
बाहर क्या बाँधेगे, भगवान दें तो इसी आँगन में तीन गाएँ और बँधा सकती हैं।
सारा गाँव गाय देखने आया। नहीं आए तो सोभा और हीरा, जो अपने सगे भाई थे। होरी के हृदय में भाइयों के लिए अब भी कोमल स्थान था। वह दोनों आ कर देख लेते और प्रसन्न हो जाते तो उसकी मनोकामना पूरी हो जाती। साँझ हो गई। दोनों पुर ले कर लौट आए। इसी द्वार से निकले, पर पूछा कुछ नहीं।
होरी ने डरते-डरते धनिया से कहा - न सोभा आया, न हीरा। सुना न होगा?
धनिया बोली - तो यहाँ कौन उन्हें बुलाने जाता है।