धनिया ने तुरंत टोका - अरे नहीं महाराज, इतना दूध कहाँ। बुढ़िया तो हो गई है। फिर यहाँ रातिब कहाँ धरा है।
दातादीन ने मर्म-भरी आँखों से देख कर उसकी सतर्कता को स्वीकार किया, मानो कह रहे हों, गृहिणी का यही धर्म है, सीटना मरदों का काम है, उन्हें सीटने दो।' फिर रहस्य-भरे स्वर में बोले - बाहर न बाँधना, इतना कहे देते हैं।
धनिया ने पति की ओर विजयी आँखों से देखा, मानो कह रही हो। लो, अब तो मानोगे।
दातादीन से बोली - नहीं महाराज,
धनिया ने तुरंत टोका - अरे नहीं महाराज, इतना दूध कहाँ। बुढ़िया तो हो गई है। फिर यहाँ रातिब कहाँ धरा है।
दातादीन ने मर्म-भरी आँखों से देख कर उसकी सतर्कता को स्वीकार किया, मानो कह रहे हों, गृहिणी का यही धर्म है, सीटना मरदों का काम है, उन्हें सीटने दो।' फिर रहस्य-भरे स्वर में बोले - बाहर न बाँधना, इतना कहे देते हैं।
धनिया ने पति की ओर विजयी आँखों से देखा, मानो कह रही हो। लो, अब तो मानोगे।
दातादीन से बोली - नहीं महाराज,