हजार बार कह दिया, मेरे मुँह पर भाइयों का बखान न किया करो, उनका नाम सुन कर मेरी देह में आग लग जाती है। सारे गाँव ने सुना, क्या उन्होंने न सुना होगा? कुछ इतनी दूर भी तो नहीं रहते। सारा गाँव देखने आया, उन्हीं के पाँवों में मेंहदी लगी हुई थी, मगर आएँ कैसे ? जलन हो रही होगी कि इसके घर गाय आ गई। छाती फटी जाती होगी।
दिया-बत्ती का समय आ गया था। धनिया ने जा कर देखा, तो बोतल में मिट्टी का तेल न था। बोतल उठा कर तेल लाने चली गई। पैसे होते तो रूपा को भेजती,
हजार बार कह दिया, मेरे मुँह पर भाइयों का बखान न किया करो, उनका नाम सुन कर मेरी देह में आग लग जाती है। सारे गाँव ने सुना, क्या उन्होंने न सुना होगा? कुछ इतनी दूर भी तो नहीं रहते। सारा गाँव देखने आया, उन्हीं के पाँवों में मेंहदी लगी हुई थी, मगर आएँ कैसे ? जलन हो रही होगी कि इसके घर गाय आ गई। छाती फटी जाती होगी।
दिया-बत्ती का समय आ गया था। धनिया ने जा कर देखा, तो बोतल में मिट्टी का तेल न था। बोतल उठा कर तेल लाने चली गई। पैसे होते तो रूपा को भेजती,