या तो उसमें फँसती ही नहीं या तुरंत निकल जाती हैं। उनके लिए वह घातक जाल क्रीड़ा की वस्तु है, भय की नहीं। भाइयों से होरी की बोलचाल बंद थी, पर रूपा दोनों घरों में आती-जाती थी। बच्चों से क्या बैर।
लेकिन रूपा घर से निकली ही थी कि धनिया तेल लिए मिल गई। उसने पूछा - साँझ की बेला कहाँ जाती है, चल घर।
रूपा माँ को प्रसन्न करने के प्रलोभन को न रोक सकी।
धनिया ने डाँटा - चल घर, किसी को बुलाने नहीं जाना है।
रूपा का हाथ पकड़े
या तो उसमें फँसती ही नहीं या तुरंत निकल जाती हैं। उनके लिए वह घातक जाल क्रीड़ा की वस्तु है, भय की नहीं। भाइयों से होरी की बोलचाल बंद थी, पर रूपा दोनों घरों में आती-जाती थी। बच्चों से क्या बैर।
लेकिन रूपा घर से निकली ही थी कि धनिया तेल लिए मिल गई। उसने पूछा - साँझ की बेला कहाँ जाती है, चल घर।
रूपा माँ को प्रसन्न करने के प्रलोभन को न रोक सकी।
धनिया ने डाँटा - चल घर, किसी को बुलाने नहीं जाना है।
रूपा का हाथ पकड़े