घर में एक ही फूल की थाली थी। होरी उसी थाली में खाता था। थाली में खाने का गौरव पाने के लिए रूपा होरी के साथ खाती थी। इस गौरव का परित्याग कैसे करे? हुमक कर बोली - अच्छा, तुम्हारी।
'तो फिर मेरा कहना मानेगी कि अम्माँ का?
'तुम्हारा।'
'तो जा कर हीरा और सोभा को खींच ला।'
'और जो अम्माँ बिगड़ें?'
'अम्माँ से कहने कौन जायगा।'
रूपा कूदती हुई हीरा के घर चली। द्वेष का मायाजाल बड़ी-बड़ी मछलियों को ही फँसाता है। छोटी मछलियाँ
घर में एक ही फूल की थाली थी। होरी उसी थाली में खाता था। थाली में खाने का गौरव पाने के लिए रूपा होरी के साथ खाती थी। इस गौरव का परित्याग कैसे करे? हुमक कर बोली - अच्छा, तुम्हारी।
'तो फिर मेरा कहना मानेगी कि अम्माँ का?
'तुम्हारा।'
'तो जा कर हीरा और सोभा को खींच ला।'
'और जो अम्माँ बिगड़ें?'
'अम्माँ से कहने कौन जायगा।'
रूपा कूदती हुई हीरा के घर चली। द्वेष का मायाजाल बड़ी-बड़ी मछलियों को ही फँसाता है। छोटी मछलियाँ