गोदान - Godan

और द्वार की ओर ले चला। वह इसी वक्त गाय को भोला के घर पहुँचाने का दृढ़ निश्चय कर चुका था। इतना बड़ा कलंक सिर पर ले कर वह अब गाय को घर में नहीं रख सकता। किसी तरह नहीं।

धनिया ने पूछा - कहाँ लिए जाते हो रात को?

होरी ने एक पग बढ़ा कर कहा - ले जाता हूँ भोला के घर। लौटा दूँगा।

धनिया को विस्मय हुआ, उठ कर सामने आ गई और बोली - लौटा क्यों दोगे? लौटाने के लिए ही लाए थे?

'हाँ, इसके लौटा देने में ही कुसल है।'

'क्यों बात क्या


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और द्वार की ओर ले चला। वह इसी वक्त गाय को भोला के घर पहुँचाने का दृढ़ निश्चय कर चुका था। इतना बड़ा कलंक सिर पर ले कर वह अब गाय को घर में नहीं रख सकता। किसी तरह नहीं।

धनिया ने पूछा - कहाँ लिए जाते हो रात को?

होरी ने एक पग बढ़ा कर कहा - ले जाता हूँ भोला के घर। लौटा दूँगा।

धनिया को विस्मय हुआ, उठ कर सामने आ गई और बोली - लौटा क्यों दोगे? लौटाने के लिए ही लाए थे?

'हाँ, इसके लौटा देने में ही कुसल है।'

'क्यों बात क्या


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