ने डाँटा - फिर क्यों बक-बक करने लगी तू! घर क्यों नहीं जाती?
धनिया जमीन पर बैठ गई और आर्त स्वर में बोली - अब तो इसके जूते खा के जाऊँगी। जरा इसकी मरदुमी देख लूँ, कहाँ है गोबर? अब किस दिन काम आएगा? तू देख रहा है बेटा, तेरी माँ को जूते मारे जा रहे हैं!
यों विलाप करके उसने अपने क्रोध के साथ होरी के क्रोध को भी क्रियाशील बना डाला। आग को फूँक-फूँक कर उसमें ज्वाला पैदा कर दी। हीरा पराजित-सा पीछे हट गया। पुन्नी उसका हाथ पकड़
ने डाँटा - फिर क्यों बक-बक करने लगी तू! घर क्यों नहीं जाती?
धनिया जमीन पर बैठ गई और आर्त स्वर में बोली - अब तो इसके जूते खा के जाऊँगी। जरा इसकी मरदुमी देख लूँ, कहाँ है गोबर? अब किस दिन काम आएगा? तू देख रहा है बेटा, तेरी माँ को जूते मारे जा रहे हैं!
यों विलाप करके उसने अपने क्रोध के साथ होरी के क्रोध को भी क्रियाशील बना डाला। आग को फूँक-फूँक कर उसमें ज्वाला पैदा कर दी। हीरा पराजित-सा पीछे हट गया। पुन्नी उसका हाथ पकड़