कर घर की ओर खींच रही थी। सहसा धनिया ने सिंहनी की भाँति झपट कर हीरा को इतने जोर से धक्का दिया कि वह धम से गिर पड़ा और बोली - कहाँ जाता है, जूते मार, मार जूते, देखूँ तेरी मरदुमी!
होरी ने दौड़ कर उसका हाथ पकड़ लिया और घसीटता हुआ घर ले चला।
भाग 5
उधर गोबर खाना खा कर अहिराने में जा पहुँचा। आज झुनिया से उसकी बहुत-सी बातें हुई थीं। जब वह गाय ले कर चला था, तो झुनिया आधे रास्ते तक उसके साथ आई थी। गोबर अकेला गाय को कैसे ले
कर घर की ओर खींच रही थी। सहसा धनिया ने सिंहनी की भाँति झपट कर हीरा को इतने जोर से धक्का दिया कि वह धम से गिर पड़ा और बोली - कहाँ जाता है, जूते मार, मार जूते, देखूँ तेरी मरदुमी!
होरी ने दौड़ कर उसका हाथ पकड़ लिया और घसीटता हुआ घर ले चला।
भाग 5
उधर गोबर खाना खा कर अहिराने में जा पहुँचा। आज झुनिया से उसकी बहुत-सी बातें हुई थीं। जब वह गाय ले कर चला था, तो झुनिया आधे रास्ते तक उसके साथ आई थी। गोबर अकेला गाय को कैसे ले