का हाथ पकड़ लिया। जैसे बिजली के तार पर हाथ पड़ गया हो। सारी देह यौवन के पहले स्पर्श से काँप उठी। कितनी मुलायम, गुदगुदी, कोमल कलाई।
झुनिया ने उसका हाथ हटाया नहीं, मानो इस स्पर्श का उसके लिए कोई महत्व ही न हो। फिर एक क्षण के बाद गंभीर भाव से बोली - आज तुमने मेरा हाथ पकड़ा है, याद रखना।
'खूब याद रखूँगा झूना और मरते दम तक निबाहूँगा।'
झुनिया अविश्वास-भरी मुस्कान से बोली - इसी तरह तो सब कहते हैं गोबर! बल्कि इससे भी मीठे,
का हाथ पकड़ लिया। जैसे बिजली के तार पर हाथ पड़ गया हो। सारी देह यौवन के पहले स्पर्श से काँप उठी। कितनी मुलायम, गुदगुदी, कोमल कलाई।
झुनिया ने उसका हाथ हटाया नहीं, मानो इस स्पर्श का उसके लिए कोई महत्व ही न हो। फिर एक क्षण के बाद गंभीर भाव से बोली - आज तुमने मेरा हाथ पकड़ा है, याद रखना।
'खूब याद रखूँगा झूना और मरते दम तक निबाहूँगा।'
झुनिया अविश्वास-भरी मुस्कान से बोली - इसी तरह तो सब कहते हैं गोबर! बल्कि इससे भी मीठे,