थीं। तन्मय हो कर सुन रहा था। कभी-कभी तो आप-ही-आप उसके पाँव रूक जाते, फिर सचेत हो कर चलने लगता। झुनिया ने पहले अपने रूप से मोहित किया था। आज उसने अपने ज्ञान और अनुभव से भरी बातें और अपने सतीत्व के बखान से मुग्ध कर लिया। ऐसी रूप, गुण, ज्ञान की आगरी उसे मिल जाय, तो धन्य भाग। फिर वह क्यों पंचायत और बिरादरी से डरे?
झुनिया ने जब देख लिया कि उसका गहरा रंग जम गया, तो छाती पर हाथ रख कर जीभ दाँत से काटती हुई बोली - अरे, यह तो तुम्हारा गाँव आ गया! तुम भी बड़े मुरहे हो,
थीं। तन्मय हो कर सुन रहा था। कभी-कभी तो आप-ही-आप उसके पाँव रूक जाते, फिर सचेत हो कर चलने लगता। झुनिया ने पहले अपने रूप से मोहित किया था। आज उसने अपने ज्ञान और अनुभव से भरी बातें और अपने सतीत्व के बखान से मुग्ध कर लिया। ऐसी रूप, गुण, ज्ञान की आगरी उसे मिल जाय, तो धन्य भाग। फिर वह क्यों पंचायत और बिरादरी से डरे?
झुनिया ने जब देख लिया कि उसका गहरा रंग जम गया, तो छाती पर हाथ रख कर जीभ दाँत से काटती हुई बोली - अरे, यह तो तुम्हारा गाँव आ गया! तुम भी बड़े मुरहे हो,