'आना पड़ेगा, नहीं कहे देती हूँ।'
'तुम भी बचन दो कि मिलोगी?'
'मैं बचन नहीं देती।'
'तो मैं भी नहीं आता।'
'मेरी बला से!'
झुनिया अँगूठा दिखा कर चल दी। प्रथम-मिलन में ही दोनों एक-दूसरे पर अपना-अपना अधिकार जमा चुके थे। झुनिया जानती थी, वह आएगा, कैसे न आएगा? गोबर जानता था, वह मिलेगी, कैसे न मिलेगी?
जब वह अकेला गाय को हाँकता हुआ चला, तो ऐसा लगता था, मानो स्वर्ग से गिर पड़ा है।
भाग 6
जेठ की उदास और गर्म संध्या सेमरी की सड़कों और गलियों में,
'आना पड़ेगा, नहीं कहे देती हूँ।'
'तुम भी बचन दो कि मिलोगी?'
'मैं बचन नहीं देती।'
'तो मैं भी नहीं आता।'
'मेरी बला से!'
झुनिया अँगूठा दिखा कर चल दी। प्रथम-मिलन में ही दोनों एक-दूसरे पर अपना-अपना अधिकार जमा चुके थे। झुनिया जानती थी, वह आएगा, कैसे न आएगा? गोबर जानता था, वह मिलेगी, कैसे न मिलेगी?
जब वह अकेला गाय को हाँकता हुआ चला, तो ऐसा लगता था, मानो स्वर्ग से गिर पड़ा है।
भाग 6
जेठ की उदास और गर्म संध्या सेमरी की सड़कों और गलियों में,