गोदान - Godan



दोनों कुछ दूर चलते रहे। एक तो जेठ की धूप, दूसरे पथरीला रास्ता। मालती थक कर बैठ गई।

मेहता खड़े-खड़े बोले - अच्छी बात है, तुम आराम कर लो। मैं यहीं आ जाऊँगा।

'मुझे अकेले छोड़ कर चले जाओगे?'

'मैं जानता हूँ, तुम अपने रक्षा कर सकती हो!'

'कैसे जानते हो?'

'नए युग की देवियों की यही सिफत है। वह मर्द का आश्रय नहीं चाहतीं, उससे कंधा मिला कर चलना चाहती हैं।'

मालती ने झेंपते हुए कहा - तुम कोरे फिलासफर हो मेहता, सच।

सामने


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दोनों कुछ दूर चलते रहे। एक तो जेठ की धूप, दूसरे पथरीला रास्ता। मालती थक कर बैठ गई।

मेहता खड़े-खड़े बोले - अच्छी बात है, तुम आराम कर लो। मैं यहीं आ जाऊँगा।

'मुझे अकेले छोड़ कर चले जाओगे?'

'मैं जानता हूँ, तुम अपने रक्षा कर सकती हो!'

'कैसे जानते हो?'

'नए युग की देवियों की यही सिफत है। वह मर्द का आश्रय नहीं चाहतीं, उससे कंधा मिला कर चलना चाहती हैं।'

मालती ने झेंपते हुए कहा - तुम कोरे फिलासफर हो मेहता, सच।

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