गोदान - Godan

वृक्ष पर एक मोर बैठा हुआ था। मेहता ने निशाना साधा और बंदूक चलाई। मोर उड़ गया।

मालती प्रसन्न हो कर बोली - बहुत अच्छा हुआ। मेरा शाप पड़ा।

मेहता ने बंदूक कंधों पर रख कर कहा - तुमने मुझे नहीं, अपने आपको शाप दिया। शिकार मिल जाता, तो मैं दस मिनट की मुहलत देता। अब तो तुमको फौरन चलना पड़ेगा।

मालती उठ कर मेहता का हाथ पकड़ती हुई बोली - फिलासफरों के शायद हृदय नहीं होता। तुमने अच्छा किया, विवाह नहीं किया, उस गरीब को मार ही


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वृक्ष पर एक मोर बैठा हुआ था। मेहता ने निशाना साधा और बंदूक चलाई। मोर उड़ गया।

मालती प्रसन्न हो कर बोली - बहुत अच्छा हुआ। मेरा शाप पड़ा।

मेहता ने बंदूक कंधों पर रख कर कहा - तुमने मुझे नहीं, अपने आपको शाप दिया। शिकार मिल जाता, तो मैं दस मिनट की मुहलत देता। अब तो तुमको फौरन चलना पड़ेगा।

मालती उठ कर मेहता का हाथ पकड़ती हुई बोली - फिलासफरों के शायद हृदय नहीं होता। तुमने अच्छा किया, विवाह नहीं किया, उस गरीब को मार ही


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