गोदान - Godan



'कोई हरज नहीं, मैं आ रही हूँ। आगे न बढ़ना, खबरदार।'

मालती साड़ी ऊपर चढ़ा कर नाले में पैठी। मगर दस हाथ आते-आते पानी उसकी कमर तक आ गया।

मेहता घबड़ाए। दोनों हाथ से उसे लौट जाने को कहते हुए बोले - तुम यहाँ मत आओ मालती! यहाँ तुम्हारी गर्दन तक पानी है।

मालती ने एक कदम और आगे बढ़ कर कहा - होने दो। तुम्हारी यही इच्छा है कि मैं मर जाऊँ तो तुम्हारे पास ही मरूँगी।

मालती पेट तक पानी में थी। धार इतनी तेज थी कि मालूम होता था,


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'कोई हरज नहीं, मैं आ रही हूँ। आगे न बढ़ना, खबरदार।'

मालती साड़ी ऊपर चढ़ा कर नाले में पैठी। मगर दस हाथ आते-आते पानी उसकी कमर तक आ गया।

मेहता घबड़ाए। दोनों हाथ से उसे लौट जाने को कहते हुए बोले - तुम यहाँ मत आओ मालती! यहाँ तुम्हारी गर्दन तक पानी है।

मालती ने एक कदम और आगे बढ़ कर कहा - होने दो। तुम्हारी यही इच्छा है कि मैं मर जाऊँ तो तुम्हारे पास ही मरूँगी।

मालती पेट तक पानी में थी। धार इतनी तेज थी कि मालूम होता था,


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