मेहता ने कुछ उत्तर न दिया। बंदूक कनपटी से कंधों पर दबा ली और मालती को दोनों हाथों से उठा कर कंधों पर बैठा लिया।
मालती अपने पुलक को छिपाती हुई बोली - अगर कोई देख ले?
'भद्दा तो लगता है।'
दो पग के बाद उसने करुण स्वर में कहा - अच्छा बताओ, मैं यहीं पानी में डूब जाऊँ, तो तुम्हें रंज हो या न हो? मैं तो समझती हूँ, तुम्हें बिलकुल रंज न होगा।
मेहता ने आहत स्वर से कहा - तुम समझती हो, मैं आदमी नहीं हूँ?
'मैं तो यही समझती हूँ, क्यों छिपाऊँ।'
मेहता ने कुछ उत्तर न दिया। बंदूक कनपटी से कंधों पर दबा ली और मालती को दोनों हाथों से उठा कर कंधों पर बैठा लिया।
मालती अपने पुलक को छिपाती हुई बोली - अगर कोई देख ले?
'भद्दा तो लगता है।'
दो पग के बाद उसने करुण स्वर में कहा - अच्छा बताओ, मैं यहीं पानी में डूब जाऊँ, तो तुम्हें रंज हो या न हो? मैं तो समझती हूँ, तुम्हें बिलकुल रंज न होगा।
मेहता ने आहत स्वर से कहा - तुम समझती हो, मैं आदमी नहीं हूँ?
'मैं तो यही समझती हूँ, क्यों छिपाऊँ।'