पर ये शब्द अपने रहस्यमय आशय के साथ उसके सामने नाचते रहे।
उसने इस अनुभव का आनंद उठाते हुए कहा - यह दिन याद रहेगा।
मेहता ने पूछा - तुम बहुत डर रही थीं?
'पहले तो डरी, लेकिन फिर मुझे विश्वास हो गया कि तुम हम दोनों की रक्षा कर सकते हो।'
मेहता ने गर्व से मालती को देखा - उनके मुख पर परिश्रम की लाली के साथ तेज था।
'मुझे यह सुन कर कितना आनंद आ रहा है, तुम यह समझ सकोगी मालती?'
'तुमने समझाया कब? उलटे और जंगलों में घसीटते फिरते हो,
पर ये शब्द अपने रहस्यमय आशय के साथ उसके सामने नाचते रहे।
उसने इस अनुभव का आनंद उठाते हुए कहा - यह दिन याद रहेगा।
मेहता ने पूछा - तुम बहुत डर रही थीं?
'पहले तो डरी, लेकिन फिर मुझे विश्वास हो गया कि तुम हम दोनों की रक्षा कर सकते हो।'
मेहता ने गर्व से मालती को देखा - उनके मुख पर परिश्रम की लाली के साथ तेज था।
'मुझे यह सुन कर कितना आनंद आ रहा है, तुम यह समझ सकोगी मालती?'
'तुमने समझाया कब? उलटे और जंगलों में घसीटते फिरते हो,