'मैं सचमुच खिलौना समझता हूँ। आप उन्हें प्रतिमा बनाए हुए हैं।'
खन्ना ने जोर से कहकहा मारा, हालाँकि हँसी की कोई बात न थी।
'अगर एक लोटा जल चढ़ा देने से वरदान मिल जाय, तो क्या बुरा है।'
अबकी रायसाहब ने जोर से कहकहा मारा, जिसका कोई प्रयोजन न था।
'तब आपने उस देवी को समझा ही नहीं। आप जितनी ही उसकी पूजा करेंगे, उतना ही वह आपसे दूर भागेंगी। जितना ही दूर भागिएगा, उतना ही आपकी ओर दौड़ेंगी।'
'तब तो उन्हें आपकी ओर दौड़ना चाहिए था।'
'मैं सचमुच खिलौना समझता हूँ। आप उन्हें प्रतिमा बनाए हुए हैं।'
खन्ना ने जोर से कहकहा मारा, हालाँकि हँसी की कोई बात न थी।
'अगर एक लोटा जल चढ़ा देने से वरदान मिल जाय, तो क्या बुरा है।'
अबकी रायसाहब ने जोर से कहकहा मारा, जिसका कोई प्रयोजन न था।
'तब आपने उस देवी को समझा ही नहीं। आप जितनी ही उसकी पूजा करेंगे, उतना ही वह आपसे दूर भागेंगी। जितना ही दूर भागिएगा, उतना ही आपकी ओर दौड़ेंगी।'
'तब तो उन्हें आपकी ओर दौड़ना चाहिए था।'