लेकिन संन्यास और त्याग के बिना बंधनों को तोड़ने का और क्या उपाय है?
'लेकिन जब वह संन्यास को ढोंग कहते हैं, तो खुद क्यों संन्यास लिया है?'
'उन्होंने संन्यास कब लिया है साहब, वह तो कहते हैं - आदमी को अंत तक काम करते रहना चाहिए। विचार-स्वातंत्र्य उनके उपदेशों का तत्व है।'
'मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा है। विचार-स्वातंत्रय का आशय क्या है?'
'समझ में तो मेरे भी कुछ नहीं आया, अबकी आइए, तो उनसे बातें हों। वह प्रेम को जीवन
लेकिन संन्यास और त्याग के बिना बंधनों को तोड़ने का और क्या उपाय है?
'लेकिन जब वह संन्यास को ढोंग कहते हैं, तो खुद क्यों संन्यास लिया है?'
'उन्होंने संन्यास कब लिया है साहब, वह तो कहते हैं - आदमी को अंत तक काम करते रहना चाहिए। विचार-स्वातंत्र्य उनके उपदेशों का तत्व है।'
'मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा है। विचार-स्वातंत्रय का आशय क्या है?'
'समझ में तो मेरे भी कुछ नहीं आया, अबकी आइए, तो उनसे बातें हों। वह प्रेम को जीवन