तो वह चीख मार कर गिर पड़ते। बोटी-बोटी काँप रही थी। पसीने से तर हो गए थे। रायसाहब को लाचार हो कर उनके साथ लौटना पड़ा।
जब दोनों आदमी बड़ी दूर निकल आए, तो खन्ना के होश ठिकाने आए।
बोले - खतरे से नहीं डरता, लेकिन खतरे के मुँह में उँगली डालना हिमाकत है।
'अजी, जाओ भी। जरा-सा तेंदुआ देख लिया, तो जान निकल गई।'
'मैं शिकार खेलना उस जमाने का संस्कार समझता हूँ, जब आदमी पशु था। तब से संस्कृति बहुत आगे बढ़ गई है।'
'मैं मिस मालती से आपकी कलई खोलूँगा।'
तो वह चीख मार कर गिर पड़ते। बोटी-बोटी काँप रही थी। पसीने से तर हो गए थे। रायसाहब को लाचार हो कर उनके साथ लौटना पड़ा।
जब दोनों आदमी बड़ी दूर निकल आए, तो खन्ना के होश ठिकाने आए।
बोले - खतरे से नहीं डरता, लेकिन खतरे के मुँह में उँगली डालना हिमाकत है।
'अजी, जाओ भी। जरा-सा तेंदुआ देख लिया, तो जान निकल गई।'
'मैं शिकार खेलना उस जमाने का संस्कार समझता हूँ, जब आदमी पशु था। तब से संस्कृति बहुत आगे बढ़ गई है।'
'मैं मिस मालती से आपकी कलई खोलूँगा।'