तक तटस्थ से वहीं पेड़ के नीचे खड़े थे। धूप में हिरन के पास जाने का कष्ट क्यों उठाते? कुछ समझ में न आ रहा था कि मुआमला क्या है, लेकिन जब लकड़हारे को उल्टी दिशा में जाते देखा, तो आ कर मिर्जा से बोले - आप उधर कहाँ जा रहे हैं हजरत। क्या रास्ता भूल गए?
मिर्जा ने अपराधी भाव से मुस्करा कर कहा - मैंने शिकार इस गरीब आदमी को दे दिया। अब जरा इसके घर चल रहा हूँ। आप भी आइए न।
तंखा ने मिर्जा को कौतूहल की दृष्टि से देखा और बोले - आप अपने होश में हैं या नहीं?
तक तटस्थ से वहीं पेड़ के नीचे खड़े थे। धूप में हिरन के पास जाने का कष्ट क्यों उठाते? कुछ समझ में न आ रहा था कि मुआमला क्या है, लेकिन जब लकड़हारे को उल्टी दिशा में जाते देखा, तो आ कर मिर्जा से बोले - आप उधर कहाँ जा रहे हैं हजरत। क्या रास्ता भूल गए?
मिर्जा ने अपराधी भाव से मुस्करा कर कहा - मैंने शिकार इस गरीब आदमी को दे दिया। अब जरा इसके घर चल रहा हूँ। आप भी आइए न।
तंखा ने मिर्जा को कौतूहल की दृष्टि से देखा और बोले - आप अपने होश में हैं या नहीं?