'कह नहीं सकता। मुझे खुद नहीं मालूम।'
'शिकार इसे क्यों दे दिया?'
'इसलिए कि उसे पा कर इसे जितनी खुशी होगी, मुझे या आपको न होगी।'
तंखा खिसिया कर बोले - जाइए! सोचा था, खूब कबाब उड़ाएँगे, सो आपने सारा मजा किरकिरा कर दिया। खैर, रायसाहब और मेहता कुछ न कुछ लाएँगे ही। कोई गम नहीं। मैं इस इलेक्शन के बारे में कुछ अर्ज करना चाहता हूँ। आप नहीं खड़ा होना चाहते न सही, आपकी जैसी मर्जी, लेकिन आपको इसमें क्या ताम्मुल है कि जो लोग खड़े हो रहे हैं,
'कह नहीं सकता। मुझे खुद नहीं मालूम।'
'शिकार इसे क्यों दे दिया?'
'इसलिए कि उसे पा कर इसे जितनी खुशी होगी, मुझे या आपको न होगी।'
तंखा खिसिया कर बोले - जाइए! सोचा था, खूब कबाब उड़ाएँगे, सो आपने सारा मजा किरकिरा कर दिया। खैर, रायसाहब और मेहता कुछ न कुछ लाएँगे ही। कोई गम नहीं। मैं इस इलेक्शन के बारे में कुछ अर्ज करना चाहता हूँ। आप नहीं खड़ा होना चाहते न सही, आपकी जैसी मर्जी, लेकिन आपको इसमें क्या ताम्मुल है कि जो लोग खड़े हो रहे हैं,