का अंत हो जाए। बूढ़े जीते रहें। जवान जीकर क्या करेंगे!
रूपा एक क्षण में आ कर बोली - काका घर में नहीं हैं, पंडित दादा! काकी कहती हैं, कहीं चले गए हैं।
दातादीन ने लंबी दाढ़ी फटकार कर कहा - तूने पूछा नहीं, कहाँ चले गए हैं? घर में छिपा बैठा न हो। देख तो सोना, भीतर तो नहीं बैठा?
धनिया ने टोका - उसे मत भेजो दादा! हीरा के सिर हत्या सवार है, न जाने क्या कर बैठे।
दातादीन ने खुद लकड़ी सँभाली और खबर लाए कि हीरा सचमुच कहीं चला गया है। पुनिया कहती है,
का अंत हो जाए। बूढ़े जीते रहें। जवान जीकर क्या करेंगे!
रूपा एक क्षण में आ कर बोली - काका घर में नहीं हैं, पंडित दादा! काकी कहती हैं, कहीं चले गए हैं।
दातादीन ने लंबी दाढ़ी फटकार कर कहा - तूने पूछा नहीं, कहाँ चले गए हैं? घर में छिपा बैठा न हो। देख तो सोना, भीतर तो नहीं बैठा?
धनिया ने टोका - उसे मत भेजो दादा! हीरा के सिर हत्या सवार है, न जाने क्या कर बैठे।
दातादीन ने खुद लकड़ी सँभाली और खबर लाए कि हीरा सचमुच कहीं चला गया है। पुनिया कहती है,