गोदान - Godan

हाथ है। मगर उसके पास तो जहर खाने को भी एक पैसा नहीं है। धनिया के पास चाहे दो-चार रुपए पड़े हों, पर वह चुड़ैल भला क्यों देने लगी? मृत्यु-दंड पाए हुए आदमी की भाँति सिर झुकाए, अपने अपमान की वेदना का तीव्र अनुभव करता हुआ चुपचाप खड़ा रहा।

दातादीन ने होरी को सचेत किया - अब इस तरह खड़े रहने से काम न चलेगा होरी! रुपए की कोई जुगत करो।

होरी दीन स्वर में बोला - अब मैं क्या अरज करूँ महाराज! अभी तो पहले ही की गठरी सिर पर लदी है,


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हाथ है। मगर उसके पास तो जहर खाने को भी एक पैसा नहीं है। धनिया के पास चाहे दो-चार रुपए पड़े हों, पर वह चुड़ैल भला क्यों देने लगी? मृत्यु-दंड पाए हुए आदमी की भाँति सिर झुकाए, अपने अपमान की वेदना का तीव्र अनुभव करता हुआ चुपचाप खड़ा रहा।

दातादीन ने होरी को सचेत किया - अब इस तरह खड़े रहने से काम न चलेगा होरी! रुपए की कोई जुगत करो।

होरी दीन स्वर में बोला - अब मैं क्या अरज करूँ महाराज! अभी तो पहले ही की गठरी सिर पर लदी है,


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