कर्कशा है। ऐसी औरत को तो गोली मार दे।
'तुम लोगों का काफिया तंग कर दिया उसने। चार-चार तो मिलते ही।'
'हुजूर के भी तो पंद्रह रुपए गए।'
'मेरे कहाँ जा सकते हैं? वह न देगा, गाँव के मुखिया देंगे और पंद्रह रुपए की जगह पूरे पचास रुपए। आप लोग चटपट इंतजाम कीजिए।'
पटेश्वरीलाल ने हँस कर कहा - हुजूर बड़े दिल्लगीबाज हैं।
दातादीन बोले - बड़े आदमियों के यही लक्षण हैं। ऐसे भाग्यवानों के दर्शन कहाँ होते हैं?
दारोगा जी ने कठोर
कर्कशा है। ऐसी औरत को तो गोली मार दे।
'तुम लोगों का काफिया तंग कर दिया उसने। चार-चार तो मिलते ही।'
'हुजूर के भी तो पंद्रह रुपए गए।'
'मेरे कहाँ जा सकते हैं? वह न देगा, गाँव के मुखिया देंगे और पंद्रह रुपए की जगह पूरे पचास रुपए। आप लोग चटपट इंतजाम कीजिए।'
पटेश्वरीलाल ने हँस कर कहा - हुजूर बड़े दिल्लगीबाज हैं।
दातादीन बोले - बड़े आदमियों के यही लक्षण हैं। ऐसे भाग्यवानों के दर्शन कहाँ होते हैं?
दारोगा जी ने कठोर