स्वर में कहा - यह खुशामद फिर कीजिएगा। इस वक्त तो मुझे पचास रुपए दिलवाइए, नकद, और यह समझ लो कि आनाकानी की, तो तुम चारों के घर की तलाशी लूँगा। बहुत मुमकिन है कि तुमने हीरा और होरी को फँसा कर उनसे सौ-पचास ऐंठने के लिए पाखंड रचा हो।
नेतागण अभी तक यही समझ रहे हैं, दारोगा जी विनोद कर रहे हैं।
झिंगुरीसिंह ने आँखें मार कर कहा - निकालो पचास रुपए पटवारी साहब!
नोखेराम ने उनका समर्थन किया - पटवारी साहब का इलाका है। उन्हें जरूर आपकी खातिर करनी चाहिए।
स्वर में कहा - यह खुशामद फिर कीजिएगा। इस वक्त तो मुझे पचास रुपए दिलवाइए, नकद, और यह समझ लो कि आनाकानी की, तो तुम चारों के घर की तलाशी लूँगा। बहुत मुमकिन है कि तुमने हीरा और होरी को फँसा कर उनसे सौ-पचास ऐंठने के लिए पाखंड रचा हो।
नेतागण अभी तक यही समझ रहे हैं, दारोगा जी विनोद कर रहे हैं।
झिंगुरीसिंह ने आँखें मार कर कहा - निकालो पचास रुपए पटवारी साहब!
नोखेराम ने उनका समर्थन किया - पटवारी साहब का इलाका है। उन्हें जरूर आपकी खातिर करनी चाहिए।