'हाँ, सब कुसल है।'
'गोबर को भेज कर मुझे क्यों नहीं बुलवा लिया?'
धनिया ने कोई उत्तर न दिया। मँड़ैया में आ कर पुआल पर बैठती हुई बोली - गोबर ने तो मुँह में कालिख लगा दी, उसकी करनी क्या पूछते हो! जिस बात को डरती थी, वह हो कर रही।
'क्या हुआ? किसी से मार-पीट कर बैठा?'
'अब मैं क्या जानूँ, क्या कर बैठा, चल कर पूछो उसी राँड़ से?'
'किस राँड़ से? क्या कहती है तू - बौरा तो नहीं गई?'
'हाँ, बौरा क्यों न जाऊँगी। बात ही ऐसी हुई है कि छाती दुगनी हो जाय!'
'हाँ, सब कुसल है।'
'गोबर को भेज कर मुझे क्यों नहीं बुलवा लिया?'
धनिया ने कोई उत्तर न दिया। मँड़ैया में आ कर पुआल पर बैठती हुई बोली - गोबर ने तो मुँह में कालिख लगा दी, उसकी करनी क्या पूछते हो! जिस बात को डरती थी, वह हो कर रही।
'क्या हुआ? किसी से मार-पीट कर बैठा?'
'अब मैं क्या जानूँ, क्या कर बैठा, चल कर पूछो उसी राँड़ से?'
'किस राँड़ से? क्या कहती है तू - बौरा तो नहीं गई?'
'हाँ, बौरा क्यों न जाऊँगी। बात ही ऐसी हुई है कि छाती दुगनी हो जाय!'