युवती भी उठ बैठी और निश्चल भाव से बोली - मैं यही चाहती हूँ, तू मुझे छोड़ दे।
'कुछ मुँह से कहेगी, क्या बात हुई?'
'मेरे माई-बाप को कोई क्यों गाली दे?'
'किसने गाली दी, तेरे माई-बाप को?'
'जा कर अपने घर में पूछ।'
'चलेगी तभी तो पूछूँगा?'
'तू क्या पूछेगा? कुछ दम भी है। जा कर अम्माँ के आँचल में मुँह ढाँक कर सो। वह तेरी माँ होगी। मेरी कोई नहीं है। तू उसकी गालियाँ सुन। मैं क्यों सुनूँ? एक रोटी खाती हूँ, तो चार रोटी
युवती भी उठ बैठी और निश्चल भाव से बोली - मैं यही चाहती हूँ, तू मुझे छोड़ दे।
'कुछ मुँह से कहेगी, क्या बात हुई?'
'मेरे माई-बाप को कोई क्यों गाली दे?'
'किसने गाली दी, तेरे माई-बाप को?'
'जा कर अपने घर में पूछ।'
'चलेगी तभी तो पूछूँगा?'
'तू क्या पूछेगा? कुछ दम भी है। जा कर अम्माँ के आँचल में मुँह ढाँक कर सो। वह तेरी माँ होगी। मेरी कोई नहीं है। तू उसकी गालियाँ सुन। मैं क्यों सुनूँ? एक रोटी खाती हूँ, तो चार रोटी