गोबर ने नि:शंक भाव से कहा - मैं कोई हूँ, लेकिन अनुचित बात देख कर सभी को बुरा लगता है।
पुरुष ने सिर हिला कर कहा - मालूम होता है, अभी मेहरिया नहीं आई, तभी इतना दरद है!
'मेहरिया आएगी, तो भी उसके झोटे पकड़ कर न खींचूँगा।'
'अच्छा, तो अपने राह लो। मेरी औरत है, मैं उसे मारूँगा, काटूँगा। तुम कौन होते हो बोलने वाले। चले जाओ सीधे से, यहाँ मत खड़े हो।'
गोबर का गर्म खून और गर्म हो गया। वह क्यों चला जाय? सड़क सरकार की है। किसी के बाप की नहीं है। वह जब तक चाहे,
गोबर ने नि:शंक भाव से कहा - मैं कोई हूँ, लेकिन अनुचित बात देख कर सभी को बुरा लगता है।
पुरुष ने सिर हिला कर कहा - मालूम होता है, अभी मेहरिया नहीं आई, तभी इतना दरद है!
'मेहरिया आएगी, तो भी उसके झोटे पकड़ कर न खींचूँगा।'
'अच्छा, तो अपने राह लो। मेरी औरत है, मैं उसे मारूँगा, काटूँगा। तुम कौन होते हो बोलने वाले। चले जाओ सीधे से, यहाँ मत खड़े हो।'
गोबर का गर्म खून और गर्म हो गया। वह क्यों चला जाय? सड़क सरकार की है। किसी के बाप की नहीं है। वह जब तक चाहे,