वहाँ खड़ा रह सकता है। वहाँ से उसे हटाने का किसी को अधिकार नहीं है।
पुरुष ने होंठ चबा कर कहा - तो तुम न जाओगे? आऊँ?
गोबर ने अँगोछा कमर में बाँध लिया और समर के लिए तैयार हो कर बोला- तुम आओ या न आओ। मैं तो तभी जाऊँगा, जब मेरी इच्छा होगी।
'तो मालूम होता है, हाथ-पैर तुड़ा के जाओगे?'
'यह कौन जानता है, किसके हाथ-पाँव टूटेंगे।'
'तो तुम न जाओगे?'
'ना।'
पुरुष मुट्ठी बाँध कर गोबर की ओर झपटा। उसी क्षण युवती ने उसकी
वहाँ खड़ा रह सकता है। वहाँ से उसे हटाने का किसी को अधिकार नहीं है।
पुरुष ने होंठ चबा कर कहा - तो तुम न जाओगे? आऊँ?
गोबर ने अँगोछा कमर में बाँध लिया और समर के लिए तैयार हो कर बोला- तुम आओ या न आओ। मैं तो तभी जाऊँगा, जब मेरी इच्छा होगी।
'तो मालूम होता है, हाथ-पैर तुड़ा के जाओगे?'
'यह कौन जानता है, किसके हाथ-पाँव टूटेंगे।'
'तो तुम न जाओगे?'
'ना।'
पुरुष मुट्ठी बाँध कर गोबर की ओर झपटा। उसी क्षण युवती ने उसकी