गोदान - Godan



खन्ना झेंपते हुए बोले - जी नहीं, मुझे क्षमा कीजिए।

मिर्जा ने रायसाहब से पूछा - आपके लिए कोई जोड़ लाऊँ?

रायसाहब बोले - मेरा जोड़ तो ओंकारनाथ का है, मगर वह आज नजर ही नहीं आते।

मिर्जा और मेहता भी नंगी देह, केवल जांघिए पहने हुए मैदान में पहुँच गए। एक इधर दूसरा उधर। खेल शुरू हो गया।

जनता बूढ़े कुलेलों पर हँसती थी, तालियाँ बजाती थी, गालियाँ देती थी, ललकारती थी, बाजियाँ लगाती थी। वाह! जरा इन बूढ़े बाबा को देखो! किस शान से जा रहे हैं,


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खन्ना झेंपते हुए बोले - जी नहीं, मुझे क्षमा कीजिए।

मिर्जा ने रायसाहब से पूछा - आपके लिए कोई जोड़ लाऊँ?

रायसाहब बोले - मेरा जोड़ तो ओंकारनाथ का है, मगर वह आज नजर ही नहीं आते।

मिर्जा और मेहता भी नंगी देह, केवल जांघिए पहने हुए मैदान में पहुँच गए। एक इधर दूसरा उधर। खेल शुरू हो गया।

जनता बूढ़े कुलेलों पर हँसती थी, तालियाँ बजाती थी, गालियाँ देती थी, ललकारती थी, बाजियाँ लगाती थी। वाह! जरा इन बूढ़े बाबा को देखो! किस शान से जा रहे हैं,


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