अभी जो चाहे कह लो। पहले मैं भी यही सब बातें सोचा करता था; पर अब मालूम हुआ कि हमारी गर्दन दूसरों के पैरों के नीचे दबी हुई है, अकड़ कर निबाह नहीं हो सकता।'
पिता पर अपना क्रोध उतार कर गोबर कुछ शांत हो गया और चुपचाप चलने लगा। सोना ने देखा, रूपा बाप की गोद में चढ़ी बैठी है तो ईर्ष्या हुई। उसे डाँट कर बोली - अब गोद से उतर कर पाँव-पाँव क्यों नहीं चलती, क्या पाँव टूट गए हैं?
रूपा ने बाप की गर्दन में हाथ डाल कर ढिठाई से कहा - न उतरेंगे जाओ। काका,
अभी जो चाहे कह लो। पहले मैं भी यही सब बातें सोचा करता था; पर अब मालूम हुआ कि हमारी गर्दन दूसरों के पैरों के नीचे दबी हुई है, अकड़ कर निबाह नहीं हो सकता।'
पिता पर अपना क्रोध उतार कर गोबर कुछ शांत हो गया और चुपचाप चलने लगा। सोना ने देखा, रूपा बाप की गोद में चढ़ी बैठी है तो ईर्ष्या हुई। उसे डाँट कर बोली - अब गोद से उतर कर पाँव-पाँव क्यों नहीं चलती, क्या पाँव टूट गए हैं?
रूपा ने बाप की गर्दन में हाथ डाल कर ढिठाई से कहा - न उतरेंगे जाओ। काका,