मिर्जा ने मालती की ओर देखा - अच्छा! यह बात थी। जभी तो मुझे हैरत हो रही थी कि आप एकाएक कैसे ऊपर आ गए।
मालती शर्म से लाल हुई जाती थी। बोली - आप बड़े बेमुरौवत आदमी हैं मिर्जा जी! मुझे आज मालूम हुआ।
'कुसूर इनका था। यह क्यों 'चीं' नहीं बोलते थे?'
'मैं तो 'चीं' न बोलता, चाहे आप मेरी जान ही ले लेते।'
कुछ देर मित्रों में गपशप होती रही। फिर धन्यवाद के और मुबारकवाद के भाषण हुए और मेहमान लोग विदा हुए। मालती को भी एक विजिट
मिर्जा ने मालती की ओर देखा - अच्छा! यह बात थी। जभी तो मुझे हैरत हो रही थी कि आप एकाएक कैसे ऊपर आ गए।
मालती शर्म से लाल हुई जाती थी। बोली - आप बड़े बेमुरौवत आदमी हैं मिर्जा जी! मुझे आज मालूम हुआ।
'कुसूर इनका था। यह क्यों 'चीं' नहीं बोलते थे?'
'मैं तो 'चीं' न बोलता, चाहे आप मेरी जान ही ले लेते।'
कुछ देर मित्रों में गपशप होती रही। फिर धन्यवाद के और मुबारकवाद के भाषण हुए और मेहमान लोग विदा हुए। मालती को भी एक विजिट