झुनिया ने आ कर आँचल से छोटी सास के चरण छुए। पुनिया ने असीस दिया। सोना आग जलाने चली, रूपा ने पानी के लिए कलसा उठाया। रूकी हुई गाड़ी चल निकली। जल में अवरोध के कारण जो चक्कर था, फेन था, शोर था, गति की तीव्रता थी, वह अवरोध के हट जाने से शांत मधुर-ध्वनि के साथ सम, धीमी, एक-रस धार में बहने लगा।
पुनिया बोली - महतो को डाँड़ देने की ऐसी जल्दी क्या पड़ी थी?
धनिया ने कहा - बिरादरी में सुरखरू कैसे होते?
'भाभी, बुरा न मानो तो, एक बात कहूँ?'
झुनिया ने आ कर आँचल से छोटी सास के चरण छुए। पुनिया ने असीस दिया। सोना आग जलाने चली, रूपा ने पानी के लिए कलसा उठाया। रूकी हुई गाड़ी चल निकली। जल में अवरोध के कारण जो चक्कर था, फेन था, शोर था, गति की तीव्रता थी, वह अवरोध के हट जाने से शांत मधुर-ध्वनि के साथ सम, धीमी, एक-रस धार में बहने लगा।
पुनिया बोली - महतो को डाँड़ देने की ऐसी जल्दी क्या पड़ी थी?
धनिया ने कहा - बिरादरी में सुरखरू कैसे होते?
'भाभी, बुरा न मानो तो, एक बात कहूँ?'