एक दिन उसने झुनिया से कहा - तुम क्या देख कर गोबर के साथ आईं झूना?
झुनिया ने लजाते हुए कहा - भाग खींच लाया महराज, और क्या कहूँ।
मातादीन दु:खी मन से बोला - बड़ा बेवफा आदमी है। तुम जैसी लच्छमी को छोड़ कर न जाने कहाँ मारा-मारा फिर रहा है। चंचल सुभाव का आदमी है, इसी से मुझे संका होती है कि कहीं और न फँस गया हो। ऐसे आदमियों को तो गोली मार देनी चाहिए। आदमी का धरम है, जिसकी बाँह पकडे, उसे निभाए। यह क्या कि एक आदमी की जिंदगानी खराब कर दी और दूसरा घर ताकने लगे।
एक दिन उसने झुनिया से कहा - तुम क्या देख कर गोबर के साथ आईं झूना?
झुनिया ने लजाते हुए कहा - भाग खींच लाया महराज, और क्या कहूँ।
मातादीन दु:खी मन से बोला - बड़ा बेवफा आदमी है। तुम जैसी लच्छमी को छोड़ कर न जाने कहाँ मारा-मारा फिर रहा है। चंचल सुभाव का आदमी है, इसी से मुझे संका होती है कि कहीं और न फँस गया हो। ऐसे आदमियों को तो गोली मार देनी चाहिए। आदमी का धरम है, जिसकी बाँह पकडे, उसे निभाए। यह क्या कि एक आदमी की जिंदगानी खराब कर दी और दूसरा घर ताकने लगे।