रुपए सूद-भर को भी न होंगे। कोई ऐसी जुगत न सूझती थी कि ऊख के रुपए हाथ में आ जायँ और किसी को खबर न हो। जब बैल घर आ जाएँगे, तो कोई क्या कर लेगा? गाड़ी लदेगी, तो सारा गाँव देखेगा ही, तौल पर जो रुपए मिलेंगे, वह सबको मालूम हो जाएँगे। संभव है, मँगरू और दातादीन हमारे साथ-साथ रहें। इधर रुपए मिले, उधर उन्होंने गर्दन पकड़ी।
शाम को गिरधर ने पूछा- तुम्हारी ऊख कब तक जायगी होरी काका?
होरी ने झाँसा दिया - अभी तो कुछ ठीक नहीं है भाई, तुम कब तक ले जाओगे?
रुपए सूद-भर को भी न होंगे। कोई ऐसी जुगत न सूझती थी कि ऊख के रुपए हाथ में आ जायँ और किसी को खबर न हो। जब बैल घर आ जाएँगे, तो कोई क्या कर लेगा? गाड़ी लदेगी, तो सारा गाँव देखेगा ही, तौल पर जो रुपए मिलेंगे, वह सबको मालूम हो जाएँगे। संभव है, मँगरू और दातादीन हमारे साथ-साथ रहें। इधर रुपए मिले, उधर उन्होंने गर्दन पकड़ी।
शाम को गिरधर ने पूछा- तुम्हारी ऊख कब तक जायगी होरी काका?
होरी ने झाँसा दिया - अभी तो कुछ ठीक नहीं है भाई, तुम कब तक ले जाओगे?