गिरधर ने भी झाँसा दिया - अभी तो मेरा भी कुछ ठीक नहीं है काका!
और लोग भी इसी तरह की उड़नघाइयाँ बताते थे, किसी को किसी पर विश्वास न था। झिंगुरीसिंह के सभी रिनियाँ थे, और सबकी यही इच्छा थी कि झिंगुरीसिंह के हाथ रुपए न पड़ने पाएँ, नहीं वह सब-का-सब हजम कर जायगा। और जब दूसरे दिन असामी फिर रुपए माँगने जायगा तो नया कागज, नया नजराना, नई तहरीर। दूसरे दिन शोभा आ कर बोला - दादा, कोई ऐसा उपाय करो कि झिंगुरीसिंह को हैजा हो जाए। ऐसा गिरे कि फिर न उठे।
गिरधर ने भी झाँसा दिया - अभी तो मेरा भी कुछ ठीक नहीं है काका!
और लोग भी इसी तरह की उड़नघाइयाँ बताते थे, किसी को किसी पर विश्वास न था। झिंगुरीसिंह के सभी रिनियाँ थे, और सबकी यही इच्छा थी कि झिंगुरीसिंह के हाथ रुपए न पड़ने पाएँ, नहीं वह सब-का-सब हजम कर जायगा। और जब दूसरे दिन असामी फिर रुपए माँगने जायगा तो नया कागज, नया नजराना, नई तहरीर। दूसरे दिन शोभा आ कर बोला - दादा, कोई ऐसा उपाय करो कि झिंगुरीसिंह को हैजा हो जाए। ऐसा गिरे कि फिर न उठे।