मँगरू ने सोभा को बहुत बुरा-भला कहा - जमामार, बेईमान इत्यादि। लेने की बेर तो दुम हिलाते हो, जब देने की बारी आती है, तो गुर्राते हो। घर बिकवा लूँगा, बैल-बधिए नीलाम करा लूँगा।
सोभा ने फिर छेड़ा - अच्छा, ईमान से बताओ साह, कितने रुपए दिए थे, जिसके अब तीन सौ रुपए हो गए हैं?
'जब तुम साल के साल सूद न दोगे, तो आप ही बढ़ेंगे।'
'पहले-पहल कितने रुपए दिए थे तुमने? पचास ही तो।'
'कितने दिन हुए, यह भी तो देख।'
'पाँच-छ: साल हुए होंगे?'
मँगरू ने सोभा को बहुत बुरा-भला कहा - जमामार, बेईमान इत्यादि। लेने की बेर तो दुम हिलाते हो, जब देने की बारी आती है, तो गुर्राते हो। घर बिकवा लूँगा, बैल-बधिए नीलाम करा लूँगा।
सोभा ने फिर छेड़ा - अच्छा, ईमान से बताओ साह, कितने रुपए दिए थे, जिसके अब तीन सौ रुपए हो गए हैं?
'जब तुम साल के साल सूद न दोगे, तो आप ही बढ़ेंगे।'
'पहले-पहल कितने रुपए दिए थे तुमने? पचास ही तो।'
'कितने दिन हुए, यह भी तो देख।'
'पाँच-छ: साल हुए होंगे?'