सोना चिलम भर लाई, धनिया ने चबेना और नमक ला कर रख दिया और सभी आशा-भरी आँखों से उसकी ओर ताकने लगीं। झुनिया भी चौखट पर आ खड़ी हुई थी। होरी उदास बैठा था। कैसे मुँह-हाथ धोए, कैसे चबेना खाए। ऐसा लज्जित और ग्लानित था, मानो हत्या करके आया हो।
धनिया ने पूछा - कितने की तौल हुई?
'एक सौ बीस मिले, पर सब वहीं लुट गए, धेला भी न बचा।'
धनिया सिर से पाँव तक भस्म हो उठी। मन में ऐसा उद्वेग उठा कि अपना मुँह नोंच ले। बोली - तुम जैसा घामड़ आदमी भगवान ने क्यों रचा,
सोना चिलम भर लाई, धनिया ने चबेना और नमक ला कर रख दिया और सभी आशा-भरी आँखों से उसकी ओर ताकने लगीं। झुनिया भी चौखट पर आ खड़ी हुई थी। होरी उदास बैठा था। कैसे मुँह-हाथ धोए, कैसे चबेना खाए। ऐसा लज्जित और ग्लानित था, मानो हत्या करके आया हो।
धनिया ने पूछा - कितने की तौल हुई?
'एक सौ बीस मिले, पर सब वहीं लुट गए, धेला भी न बचा।'
धनिया सिर से पाँव तक भस्म हो उठी। मन में ऐसा उद्वेग उठा कि अपना मुँह नोंच ले। बोली - तुम जैसा घामड़ आदमी भगवान ने क्यों रचा,