दादा का सारा दुख-दलिदर दूर हो जाए।
सोना ने दोनों हाथों से उसका मुँह दबा कर कहा - बस, चुप ही रहना, नहीं कहे देती हूँ। अभी जा कर अम्माँ से मातादीन की सारी कलई खोल दूँ तो रोने लगो।
झुनिया ने पूछा - क्या कह दोगी अम्माँ से? कहने को कोई बात भी हो। जब वह किसी बहाने से घर में आ जाते हैं, तो क्या कह दूँ कि निकल जाओ, फिर मुझसे कुछ ले तो नहीं जाते? कुछ अपना ही दे जाते हैं। सिवाय मीठी-मीठी बातों के वह झुनिया से कुछ नहीं पा सकते!
दादा का सारा दुख-दलिदर दूर हो जाए।
सोना ने दोनों हाथों से उसका मुँह दबा कर कहा - बस, चुप ही रहना, नहीं कहे देती हूँ। अभी जा कर अम्माँ से मातादीन की सारी कलई खोल दूँ तो रोने लगो।
झुनिया ने पूछा - क्या कह दोगी अम्माँ से? कहने को कोई बात भी हो। जब वह किसी बहाने से घर में आ जाते हैं, तो क्या कह दूँ कि निकल जाओ, फिर मुझसे कुछ ले तो नहीं जाते? कुछ अपना ही दे जाते हैं। सिवाय मीठी-मीठी बातों के वह झुनिया से कुछ नहीं पा सकते!