लगी। उनके बीच में मालती का नाम आ जाना मानो लड़ाई का अल्टिमेटम था।
खन्ना ने सारे कागजों को जमीन पर फेंक कर कहा - तुम्हारे साथ जिंदगी तलख हो गई।
गोविंदी ने नुकीले स्वर में कहा - तो मालती से ब्याह कर लो न! अभी क्या बिगड़ा है, अगर वहाँ दाल गले।
'तुम मुझे क्या समझती हो?'
'यही कि मालती तुम-जैसों को अपना गुलाम बना कर रखना चाहती है, पति बना कर नहीं।'
'तुम्हारी निगाह में मैं इतना जलील हूँ?'
और उन्होंने इसके विरुद्ध
लगी। उनके बीच में मालती का नाम आ जाना मानो लड़ाई का अल्टिमेटम था।
खन्ना ने सारे कागजों को जमीन पर फेंक कर कहा - तुम्हारे साथ जिंदगी तलख हो गई।
गोविंदी ने नुकीले स्वर में कहा - तो मालती से ब्याह कर लो न! अभी क्या बिगड़ा है, अगर वहाँ दाल गले।
'तुम मुझे क्या समझती हो?'
'यही कि मालती तुम-जैसों को अपना गुलाम बना कर रखना चाहती है, पति बना कर नहीं।'
'तुम्हारी निगाह में मैं इतना जलील हूँ?'
और उन्होंने इसके विरुद्ध