यह जहाँ जाते हैं, वहीं कुछ-न-कुछ घर से खो आते हैं। धनिया प्रसन्न थी। रहा होरी, वह धर्म और स्वार्थ के बीच में डूब-उतरा रहा था।
होरी और गोबर मिल कर एक खाँचा बाहर लाए। भोला ने तुरंत अपने-अंगौछे का बींड़ बना कर सिर पर रखते हुए कहा - मैं इसे रख कर अभी भागा आता हूँ। एक खाँचा और लूँगा।
होरी बोला - एक नहीं, अभी दो और भरे धरे हैं। और तुम्हें न आना पड़ेगा। मैं और गोबर एक-एक खाँचा ले कर तुम्हारे साथ ही चलते हैं।
भोला स्तंभित हो गया। होरी उसे अपना भाई,
यह जहाँ जाते हैं, वहीं कुछ-न-कुछ घर से खो आते हैं। धनिया प्रसन्न थी। रहा होरी, वह धर्म और स्वार्थ के बीच में डूब-उतरा रहा था।
होरी और गोबर मिल कर एक खाँचा बाहर लाए। भोला ने तुरंत अपने-अंगौछे का बींड़ बना कर सिर पर रखते हुए कहा - मैं इसे रख कर अभी भागा आता हूँ। एक खाँचा और लूँगा।
होरी बोला - एक नहीं, अभी दो और भरे धरे हैं। और तुम्हें न आना पड़ेगा। मैं और गोबर एक-एक खाँचा ले कर तुम्हारे साथ ही चलते हैं।
भोला स्तंभित हो गया। होरी उसे अपना भाई,