बल्कि उससे भी निकट जान पड़ा। उसे अपने भीतर एक ऐसी तृप्ति का अनुभव हुआ, जिसने मानों उसके संपूर्ण जीवन को हरा कर दिया।
तीनों भूसा ले कर चले, तो राह में बातें होने लगीं।
भोला ने पूछा - दसहरा आ रहा है, मालिकों के द्वार पर तो बड़ी धूमधाम होगी?
'हाँ, तंबू-सामियाना गड़ गया है। अबकी लीला में मैं भी काम करूँगा रायसाहब ने कहा है, तुम्हें राजा जनक का माली बनना पड़ेगा।'
'मालिक तुमसे बहुत खुश हैं।'
'उनकी दया है।'
एक क्षण
बल्कि उससे भी निकट जान पड़ा। उसे अपने भीतर एक ऐसी तृप्ति का अनुभव हुआ, जिसने मानों उसके संपूर्ण जीवन को हरा कर दिया।
तीनों भूसा ले कर चले, तो राह में बातें होने लगीं।
भोला ने पूछा - दसहरा आ रहा है, मालिकों के द्वार पर तो बड़ी धूमधाम होगी?
'हाँ, तंबू-सामियाना गड़ गया है। अबकी लीला में मैं भी काम करूँगा रायसाहब ने कहा है, तुम्हें राजा जनक का माली बनना पड़ेगा।'
'मालिक तुमसे बहुत खुश हैं।'
'उनकी दया है।'
एक क्षण