मगर यहाँ भी एक महाशय आ ही गए। उस पर बच्चा रोने लगा।
मेहता ने समीप आ कर विस्मय से पूछा - आप इस वक्त यहाँ कैसे आ गईं?
गोविंदी ने बालक को चुप कराते हुए कहा - उसी तरह जैसे आप आ गए?
मेहता ने मुस्करा कर कहा - मेरी बात न चलाइए। धोबी का कुत्ता, न घर का न घाट का। लाइए, मैं बच्चे को चुप करा दूँ।
'आपने यह कला कब सीखी?'
'अभ्यास करना चाहता हूँ। इसकी परीक्षा जो होगी।'
'अच्छा! परीक्षा के दिन करीब आ गए?'
'यह तो मेरी तैयारी पर है। जब तैयार हो जाऊँगा,
मगर यहाँ भी एक महाशय आ ही गए। उस पर बच्चा रोने लगा।
मेहता ने समीप आ कर विस्मय से पूछा - आप इस वक्त यहाँ कैसे आ गईं?
गोविंदी ने बालक को चुप कराते हुए कहा - उसी तरह जैसे आप आ गए?
मेहता ने मुस्करा कर कहा - मेरी बात न चलाइए। धोबी का कुत्ता, न घर का न घाट का। लाइए, मैं बच्चे को चुप करा दूँ।
'आपने यह कला कब सीखी?'
'अभ्यास करना चाहता हूँ। इसकी परीक्षा जो होगी।'
'अच्छा! परीक्षा के दिन करीब आ गए?'
'यह तो मेरी तैयारी पर है। जब तैयार हो जाऊँगा,