और अनादर सह कर भी अपने कर्तव्य से विचलित नहीं होती, जो मातृत्व की वेदी पर अपने को बलिदान करती है, जिसके लिए त्याग ही सबसे बड़ा अधिकार है, और जो इस योग्य है कि उसकी प्रतिमा बना कर पूजी जाए।'
गोविंदी के हृदय में आनंद का कंपन हुआ। समझ कर भी न समझने का अभिनय करते हुए बोली - ऐसी स्त्री की आप तारीफ करते हैं। मेरी समझ में तो वह दया के योग्य है।
मेहता ने आश्चर्य से कहा - दया के योग्य! आप उसका अपमान करती हैं। वह आदर्श नारी है और जो आदर्श नारी हो सकती है,
और अनादर सह कर भी अपने कर्तव्य से विचलित नहीं होती, जो मातृत्व की वेदी पर अपने को बलिदान करती है, जिसके लिए त्याग ही सबसे बड़ा अधिकार है, और जो इस योग्य है कि उसकी प्रतिमा बना कर पूजी जाए।'
गोविंदी के हृदय में आनंद का कंपन हुआ। समझ कर भी न समझने का अभिनय करते हुए बोली - ऐसी स्त्री की आप तारीफ करते हैं। मेरी समझ में तो वह दया के योग्य है।
मेहता ने आश्चर्य से कहा - दया के योग्य! आप उसका अपमान करती हैं। वह आदर्श नारी है और जो आदर्श नारी हो सकती है,