गोदान - Godan

सोना, रूपा, तीनों तलैया से ऊख के भीगे हुए गट्ठे निकाल-निकाल कर खेत में ला रही हैं, और होरी गँड़ासे से ऊख के टुकड़े कर रहा है। अब वह दातादीन की मजूरी करने लगा है। अब वह किसान नहीं, मजूर है। दातादीन से अब उसका पुरोहित-जजमान का नाता नहीं, मालिक-मजदूर का नाता है।

दातादीन ने आ कर डाँटा - हाथ और फुरती से चलाओ होरी! इस तरह तो तुम दिन-भर में न काट सकोगे।

होरी ने आहत अभिमान के साथ कहा - चला ही तो रहा हूँ महाराज, बैठा तो नहीं हूँ।


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सोना, रूपा, तीनों तलैया से ऊख के भीगे हुए गट्ठे निकाल-निकाल कर खेत में ला रही हैं, और होरी गँड़ासे से ऊख के टुकड़े कर रहा है। अब वह दातादीन की मजूरी करने लगा है। अब वह किसान नहीं, मजूर है। दातादीन से अब उसका पुरोहित-जजमान का नाता नहीं, मालिक-मजदूर का नाता है।

दातादीन ने आ कर डाँटा - हाथ और फुरती से चलाओ होरी! इस तरह तो तुम दिन-भर में न काट सकोगे।

होरी ने आहत अभिमान के साथ कहा - चला ही तो रहा हूँ महाराज, बैठा तो नहीं हूँ।


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