गोदान - Godan



दातादीन मजूरों से रगड़ कर काम लेते थे, इसलिए उनके यहाँ कोई मजूर टिकता न था। होरी उनका स्वभाव जानता था, पर जाता कहाँ।

पंडित उसके सामने खड़े हो कर बोले - चलाने-चलाने में भेद है। एक चलाना वह है कि घड़ी भर में काम तमाम, दूसरा चलाना वह है कि दिन-भर में भी एक बोझ ऊख न कटे।

होरी ने विष का घूँट पी कर और जोर से हाथ चलाना शुरू किया। इधर महीनों से उसे पेट-भर भोजन न मिलता था। प्राय: एक जून तो चबेने पर ही कटता था। दूसरे जून भी कभी आधा पेट भोजन मिला,


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दातादीन मजूरों से रगड़ कर काम लेते थे, इसलिए उनके यहाँ कोई मजूर टिकता न था। होरी उनका स्वभाव जानता था, पर जाता कहाँ।

पंडित उसके सामने खड़े हो कर बोले - चलाने-चलाने में भेद है। एक चलाना वह है कि घड़ी भर में काम तमाम, दूसरा चलाना वह है कि दिन-भर में भी एक बोझ ऊख न कटे।

होरी ने विष का घूँट पी कर और जोर से हाथ चलाना शुरू किया। इधर महीनों से उसे पेट-भर भोजन न मिलता था। प्राय: एक जून तो चबेने पर ही कटता था। दूसरे जून भी कभी आधा पेट भोजन मिला,


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