भोला ने सहृदयता से पूछा - अलगौझे के समय तो तुम्हें बड़ा रंज हुआ होगा। भाइयों को तो तुमने बेटों की तरह पाला था।
होरी आर्द्र कंठ से बोला - कुछ न पूछो दादा, यही जी चाहता था कि कहीं जाके डूब मरूँ मेरे जीते-जी सब कुछ हो गया। जिनके पीछे अपने जवानी धूल में मिला दी, वही मेरे मुद्दई हो गए और झगड़े की जड़ क्या थी? यही कि मेरी घरवाली हार में काम करने क्यों नहीं जाती। पूछो, घर देखने वाला भी कोई चाहिए कि नहीं - लेना-देना, धरना-उठाना,
भोला ने सहृदयता से पूछा - अलगौझे के समय तो तुम्हें बड़ा रंज हुआ होगा। भाइयों को तो तुमने बेटों की तरह पाला था।
होरी आर्द्र कंठ से बोला - कुछ न पूछो दादा, यही जी चाहता था कि कहीं जाके डूब मरूँ मेरे जीते-जी सब कुछ हो गया। जिनके पीछे अपने जवानी धूल में मिला दी, वही मेरे मुद्दई हो गए और झगड़े की जड़ क्या थी? यही कि मेरी घरवाली हार में काम करने क्यों नहीं जाती। पूछो, घर देखने वाला भी कोई चाहिए कि नहीं - लेना-देना, धरना-उठाना,