धनिया ने बीड़ा उठाते हुए कहा - जा तो रही हूँ, लेकिन चलते हुए बैल को औंगी न देना चाहिए।
दातादीन ने लाल आँखें निकाल लीं - जान पड़ता है, अभी मिजाज ठंडा नहीं हुआ। जभी दाने-दाने को मोहताज हो।
धनिया भला क्यों चुप रहने लगी थी - तुम्हारे द्वार पर भीख माँगने तो नहीं जाती।
दातादीन ने पैने स्वर में कहा - अगर यही हाल रहा तो भीख भी माँगोगी।
धनिया के पास जवाब तैयार था, पर सोना उसे खींच कर तलैया की ओर ले गई, नहीं बात बढ़ जाती,
धनिया ने बीड़ा उठाते हुए कहा - जा तो रही हूँ, लेकिन चलते हुए बैल को औंगी न देना चाहिए।
दातादीन ने लाल आँखें निकाल लीं - जान पड़ता है, अभी मिजाज ठंडा नहीं हुआ। जभी दाने-दाने को मोहताज हो।
धनिया भला क्यों चुप रहने लगी थी - तुम्हारे द्वार पर भीख माँगने तो नहीं जाती।
दातादीन ने पैने स्वर में कहा - अगर यही हाल रहा तो भीख भी माँगोगी।
धनिया के पास जवाब तैयार था, पर सोना उसे खींच कर तलैया की ओर ले गई, नहीं बात बढ़ जाती,