गोदान - Godan



धनिया ने बीड़ा उठाते हुए कहा - जा तो रही हूँ, लेकिन चलते हुए बैल को औंगी न देना चाहिए।

दातादीन ने लाल आँखें निकाल लीं - जान पड़ता है, अभी मिजाज ठंडा नहीं हुआ। जभी दाने-दाने को मोहताज हो।

धनिया भला क्यों चुप रहने लगी थी - तुम्हारे द्वार पर भीख माँगने तो नहीं जाती।

दातादीन ने पैने स्वर में कहा - अगर यही हाल रहा तो भीख भी माँगोगी।

धनिया के पास जवाब तैयार था, पर सोना उसे खींच कर तलैया की ओर ले गई, नहीं बात बढ़ जाती,


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धनिया ने बीड़ा उठाते हुए कहा - जा तो रही हूँ, लेकिन चलते हुए बैल को औंगी न देना चाहिए।

दातादीन ने लाल आँखें निकाल लीं - जान पड़ता है, अभी मिजाज ठंडा नहीं हुआ। जभी दाने-दाने को मोहताज हो।

धनिया भला क्यों चुप रहने लगी थी - तुम्हारे द्वार पर भीख माँगने तो नहीं जाती।

दातादीन ने पैने स्वर में कहा - अगर यही हाल रहा तो भीख भी माँगोगी।

धनिया के पास जवाब तैयार था, पर सोना उसे खींच कर तलैया की ओर ले गई, नहीं बात बढ़ जाती,


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