गोबर ने शरमाते हुए कहा - कहीं दूर नहीं गया था अम्माँ, यहाँ लखनऊ में तो था।
'और इतने नियरे रह कर भी कभी एक चिट्ठी न लिखी?'
उधर सोना और रूपा भीतर गोबर का सामान खोल कर चीज का बाँट-बखरा करने में लगी हुई थीं, लेकिन झुनिया दूर खड़ी थी। उसके मुख पर आज मान का शोख रंग झलक रहा है। गोबर ने उसके साथ जो व्यवहार किया है, आज वह उसका बदला लेगी। असामी को देख कर महाजन उससे वह रुपए वसूल करने को भी व्याकुल हो रहा है, जो उसने बट्टेखाते
गोबर ने शरमाते हुए कहा - कहीं दूर नहीं गया था अम्माँ, यहाँ लखनऊ में तो था।
'और इतने नियरे रह कर भी कभी एक चिट्ठी न लिखी?'
उधर सोना और रूपा भीतर गोबर का सामान खोल कर चीज का बाँट-बखरा करने में लगी हुई थीं, लेकिन झुनिया दूर खड़ी थी। उसके मुख पर आज मान का शोख रंग झलक रहा है। गोबर ने उसके साथ जो व्यवहार किया है, आज वह उसका बदला लेगी। असामी को देख कर महाजन उससे वह रुपए वसूल करने को भी व्याकुल हो रहा है, जो उसने बट्टेखाते