दातादीन, झिंगुरी, सब सालों को पीट कर गिरा दूँ और उनके पेट से रुपए निकाल लूँ।'
'रुपए की बहुत गरमी चढ़ी है साइत। लाओ निकालो, देखूँ, इतने दिन में क्या कमा लाए हो?'
उसने गोबर की कमर में हाथ लगाया। गोबर खड़ा हो कर बोला - अभी क्या कमाया, हाँ, अब तुम चलोगी, तो कमाऊँगा। साल-भर तो सहर का रंग-ढंग पहचानने ही में लग गया।
'अम्माँ जाने देंगी, तब तो?'
'अम्माँ क्यों न जाने देंगी? उनसे मतलब?'
'वाह! मैं उनकी राजी बिना न जाऊँगी।
दातादीन, झिंगुरी, सब सालों को पीट कर गिरा दूँ और उनके पेट से रुपए निकाल लूँ।'
'रुपए की बहुत गरमी चढ़ी है साइत। लाओ निकालो, देखूँ, इतने दिन में क्या कमा लाए हो?'
उसने गोबर की कमर में हाथ लगाया। गोबर खड़ा हो कर बोला - अभी क्या कमाया, हाँ, अब तुम चलोगी, तो कमाऊँगा। साल-भर तो सहर का रंग-ढंग पहचानने ही में लग गया।
'अम्माँ जाने देंगी, तब तो?'
'अम्माँ क्यों न जाने देंगी? उनसे मतलब?'
'वाह! मैं उनकी राजी बिना न जाऊँगी।